Saturday, 22 August 2015

अकबर

अकबर का जन्म १५४२ ई० मे , हुमायूँ के प्रवास काल के दौरन ,अमरकोट मे हुआ | अकबर की माँ का नाम हमिदावानो था | अकबर का राज्यभिसेक १५५६ ई० मे हुआ | १५६० ई० तक अकबर ने बैरम खा के सनरछण मे शासन किया | बैरम खां को उसका बकील नियुक्त किया गया था | सिंहासन पर बैठते ही अकबर ने बैरम खां की सहायता से १५५६ ई० मे पानीपत के दितीय युद्ध मे हेमू बिक्रमादित्य को पराजित किया | १५६१ ई० अकबर ने बैरम खां के संरछण से मुक्त होकर ,अपने पहले सैन्य अभियान मे मालवा के शासक बाजबहादुर को पराजित किया | १५६४ ई० मे अकबर ने ,जजिया कर , को समाप्त कर दिया | १५७५ ई ० के हल्दीघाटी ‘’ के प्रसिद्ध युद्ध मे अकबर के सेनापति राजा मानसिंह ने मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप को पराजित किया | १५७५ ई ० मे अकबर ने आगरा से ३६ किमी ० दूर फतेहपुर सीकरी नामक नगर की स्थापना की और उसमे प्रवेश के लिए बुलंद दरवाजा बनवाया | बुलंद दरवाजा अकबर ने गुजरात जीतने के उपलब्ध मे बनवाया था | इसी बर्ष अकबर ने फतेहपुर सीकरी मे धार्मिक परीचर्चाओ हेतु इबादतखाने की स्थापना की | १५८२ ई० मे अकबर ने सभी धर्मो के उत्तम सिधान्तो को लेकर तौहीद-ए-इलाही या दीन-ए-इलाही नामक नये धर्म की स्थापना की |अकबर के पुत्र सलीम के बिद्रोह के कारण अकबर के अंतिम दिन दुःख भरे ब्यतीत हुए | १६०५ ई० मे अकबर की म्रत्यु हो गई | अकबर के मकबरे का निर्माण जहाँगीर दुआरा आगरा के निकट सिकंदरा
नामक स्थान पर कराया गया | 

Tuesday, 18 August 2015

नरेन्द्र मोदी मोबाइल एप्प

जैसा हम जानते है नरेन्द्र मोदी हमारे देश इंडिया के प्रधान मंत्री है अपनी आवाज से सबका मन मोहने वाले हमारे देश के प्रधान मंत्री ने  अपनी डिजिटल मौजूदगी को और पुख्ता बनाने की पहल के तहत आज एक  एप्प लांच की है जिसका नाम उन्होंने  ‘नरेन्द्र मोदी मोबाइल एप्प’ रखा है जिसके माध्यम से वह अपनी जरूरी जानकारी तत्काल अपडेट करने के साथ उनसे सीधा मैसेज और ई मेल प्राप्त करने का भी मौका मिल सकेगा। इस एप्प के माध्यम से वह अपनी बात लोगो तक तुरंत पंहुचा सकेंगे। या यह कह सकते है की  इस एंड्रॉयड आधारित इस एप्लीकेशन का मकसद लोगों को उनसे सीधा संवाद करने का मौका प्रदान करने और विचारों एवं सुझावों को साझा करने का मौका प्रदान करना है।

जब मोदी जी ने इस एेप को लांच किया तो सबसे पहले उन्होंने ट्वीट किया, की ‘‘नरेन्द्र मोदी मोबाइल एप्प पेश किया। आइए, मोबाइल से जुड़ें रहे। इस मोबाइल एप्प में कई नवोन्मेषी विशेषताएं हैं। आप प्ले स्टोर से इसे डाउनलोड कर सकते हैं। सभी लोग अपने इस बारे में फीडबैक दे सकते है जिसमे सबका स्वागत है।’’

इस एप्लीकेशन के ब्यौरे में कहा गया है, ‘‘इस एप्प को डाउनलोड करें और किसी भी समय और कहीं भी ताजा अपडेट प्राप्त करें। नरेन्द्र मोदी एप्प की विशेषताओं में ताजा समाचार एवं अपडेट प्राप्त करने से लेकर प्रधानमंत्री से सीधे ईमेल और मैसेज प्राप्त करना और प्रधानमंत्री से मन की बात करना शामिल है।’’


क्या है खास बात नरेन्द्र मोदी मोबाइल एप में  - 

  1. पीएम कर सकते हैं सीधे ही मेल
  2. एक गाने जितना लेगा स्पेस

इस नरेंद्र मोदी एप का कुल स्पेस 4.9 एमबी है यानि की ये  नरेंद्र मोदी एप सिर्फ आपके मोबाइल में ४.९ MB जगह लेगा  यानि यह एप आपके मोबाइल फोन में महज एक एमपी3 गाने जितना ही स्पेस घेरेगा। अभी इस समय एप का यह 1.0.1 वर्जन जो गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध  है जिसें एंड्रॉयड के 4.0 अथवा उससे अधिक वर्जन वाले गैजेट्स में डाउनलोड किया जा सकता है। जब आप Narendra modi एप को इन्स्टॉल कर लेंगे तब आप देखेंगे की इसमें इंटरेक्ट विद सीएम का ऑप्शन आता है। इसका मतलब आप तुरंत इस ऑप्शन का युस करके आप इनबॉक्स के साथ आप पीएम को मेल लिख सकते हैं। और इसमें आइडिया एंड सजेशन, पीएम के साथ मन की बात समेत पीएम मोदी की सरकार में आने के बाद उपलब्घियों समेत कई सारी जानकारियां ले सकते हैं। इसके अलावा पीएम की तरफ से आने वाले ई-मेल भी यहीं पर दिखते हैं। 

गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध - 
इस एप को गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध कराया गया है, जहां से आप इसे बिल्कुल फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं।

यहां से करें डाउनलोड-
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.narendramodiapp&hl=en


ऎसे करें डाउनलोड और इंस्टॉल
अगर आप नरेन्द्र मोदी एप को आपके फोन में डाउनलोड करना चाहते तो पहले Google Play Store में जाये और नरेन्द्र मोदी एप सर्च करे। लेकिन ये ध्यान रखे नरेन्द्र मोदी एप के नाम से प्ले स्टोर पर नरेंद्र मोदी से कई सरे एप्प मौजूद है ऎसे में सही एप के लिए आप नरेन्द्र मोदी डॉट इन वाले एप को ही देखें। एकबार एप को ओपन करने के बाद एप स्टोर में लॉगइन कर इसे डाउनलोड कर सकते हैं। लॉगइन करने के लिए आप अपने फेसबुक, टि्वटर, गूगल प्लस अथवा एनएम डॉट इन एकाउंट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। एकबार इंस्टॉल करने के बाद इस इस एप का इस्तेमाल कर सकते हैं।


Monday, 17 August 2015

रिक्रेशन

रिक्रेशन क्या है जब हम लम्बे समय तक कोई काम करते है तब हम थकान महसूस करते है तो हमे कुछ आराम की आवश्यकता होती है | आराम हमे fresh और active बनता है | अपने खाली समय में हम मस्ती करना और रिलैक्स करना पसंद करते है | यह Recreation कहलाता है |
हम अपने खाली समय में कैसे आनंद उठा सकते है

बच्चे खाली समय में बिभिन्न प्रकार से आनंद उठाते है | कुछ बच्चे अपना होम वर्क ख़त्म होने के लिए pray करते है वे इनडोर गेम्स ,लूडो , स्नेक्स व लैडरस ,कैरम चैस आदि खेलते है | बड़े लोग पत्ते खेलते है | कुछ बच्चे बाहर खेलना पसंद करते है | कुछ बच्चे बाहर खेलना पसंद करते है | वे फुटबाल ,हॉकी और क्रिकेट आदि खेलते है कुछ बच्चे स्टोरी बुक्स और कोम्मिक्स पढ़ने का आनन्द उठाते है | कुछ बच्चे TV पर अपना पसंदीदा प्रोग्राम देखना पसन्द करते है | कुछ बच्चे TV पर गेम्स खेलना पसंद करते है कुछ बच्चे म्यूजिक सुनना पसंद करते है | कभी गांवो में सर्कस होता है | तो बच्चे उसे देखकर आनन्द उठाते  है | म्यूजियम में बिभिन्न चीजे देखते है | हम चिडीयाघर में जानवरों और चिडीयों का खेलना देखते है | त्योहारों में हम बच्चों को मिठाईयां और खिलौने खरीदते हुये नजर आते है | सिनेमा गावों में इन रिक्रिएशन  का अच्छा अर्थ है बच्चे सिनेमा हाल में फिल्मे देखने का आनन्द उठाते है | बच्चे पिकनिक जाना भी पसंद करते है | वे यहाँ अपने परिवार तथा मित्रों के साथ खेलना खाना और मस्ती करते है | बच्चे लम्बी छुट्टियों में पहाड़ी जगहों या और जगह का आनन्द उठाते है | रिक्रिएशन हमारे स्वास्थ्य और ख़ुशी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है |

ईश्वर

हम भगवान की   प्राथना खुद को सुरक्षित और खुश रखने के लिए करते है और खुद को अच्छा इन्सान बनाने के लिए करते है | हम इन सबके लिए ईश्वर का धन्यबाद करते है | कि वो हमे सब देता है | लोग बिभिन्न धर्म के होते है | वे ईश्वर की पूजा बिभिन्न प्रकार से करते है | प्रशांत के बहुत से मित्र आसिफ जाहन और गुरमीत आदि है | प्रशांत हिन्दू है आसिफ मुस्लिम ,जाहन , क्रिस्चियन तथा गुरमीत सिकख है | हिन्दू मन्दिर में पूजा करते है | वे मिठाईयां और फूल बिभिन्न भगवानो को चढाते है | भगवान जैसे राम , क्रिशन और शिवा मुख्य भगवान है |दुर्गा और लक्ष्मी मुख्य भगवान है | रामायण और भागवत गीता हिन्दुओ की पवित्र ग्रन्थ है | क्रिश्चयन चर्च जाते है | और जीजस क्राइस्ट की प्राथना करते है | उनकी पवित्र ग्रन्थ बाइबिल है | मुस्लिम मज्जिदो में पूजा करते है | वे एक दिन में पांच वार नुमाज अदा करते है \ उनकी पवित्र ग्रन्थ कुरान है | ‘’ गुरु ग्रन्थ साहिब है | ‘’ वे गुरुवाणी हिम्नस गाते है | जैन ‘’ लार्ड महाविरा की पूजा करते है | बुद्ध लार्ड बुद्ध की पूजा करते है | पारसिस पारसी पूजा करते है , मन्दिर में | हम सब पूजा करते है | हम सब भगवान की पूजा बिभिन्न स्थानों पर भिन्न प्रकार से करते है | लेकिन हम सब एक ही भगवान को पूजते है | हमे सभी धर्मो को आदर देना चाहिए |

Saturday, 8 August 2015

चाय

चाय
इतिहास
चाय एक लोकप्रिय पेय है। यह चाय के पौधों की पत्तियों से बनता है। सबसे पहले सन् १८१५ में कुछ अंग्रेज़ यात्रियों का ध्यान  असम में उगने वाली चाय की झाड़ियों पर गया जिससे स्थानीय क़बाइली लोग एक पेय बनाकर पीते थे। भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड बैंटिक ने १८३४ में चाय की परंपरा भारत में शुरू करने और उसका उत्पादन करने की संभावना तलाश करने के लिए एक समिति का गठन किया। इसके बाद १८३५ में  असम में चाय के बाग़ लगाए गए । हमारे दैनिक प्रयोग में आने वाली चाय एक चौड़ी पत्ती वाली सदाबहार झाड़ी है | चाय के उत्पादन में भारत विश्व में अग्रणी है और यहाँ से सबसे अधिक चाय बाहर भेजी जाती है | चाय की खेती के लिए सामान्यतः उष्ण-आद्र जलवायु आवश्यक होती है |  इसकी खेती के लिए लगभग २५ ० सेग्रे का तापमान ३० ० सेग्रे का तापमान तथा १५० सेमी से अधिक बर्षा होनी चाहिए | चाय की झाड़ीयों की जड़ों में पानी इकट्ठा नही होना चाहिए | इसलिए चाय के बागान  पहाड़ी ढालों पर लगाये जाते है | चाय की पत्तीयों को चुनने , सूखाने और डिब्बों में भरने के लिए काफी सस्ते मजदूरों की आवश्यकता होती है | दशिणी भारत में नीलगिरी ,अन्नामलाई की पहाडीयों में चाय पैदा की जाती है | भारत की चाय विश्व में उच्च कोटि की मानी जाती है | ग्रेट ब्रिटेन हमारी चाय का मुख्य ग्राहक है| अन्य ग्राहक फ्रांस ,कनाडा ,संयुक्त राज्य अमेरिका ,ऑस्ट्रेलिया ,न्यूजीलैंड आदि है | चाय के निर्यात से प्रति बर्ष भारत को काफी विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है |

उत्पादन
वर्ष २००३ तक पूरे विश्व में चाय का उत्पादन ३.१५ मिलियन टन वार्षिक था। प्रमुख उत्पादक देशों में  भारत, तथा उसके बाद चीन का स्थान था | अन्य प्रमुख उत्पादक देशों में श्रीलंका एवं कीनिया इसके बाद महत्त्वपूर्ण स्थान 
रखते हैं। चीन ही अभी एकमात्र ऐसा देश है जो लगभग हर तरह की चाय का बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन करता है।






जूट

जूट
जूट एक  द्विबीजपत्री रेशेदार पौधा है। इसका तना पतला और बेलनाकार होता है। जूट के रेशे से बोरे, हेसियन तथा पैंकिंग के कपड़े बनते हैं। कालीन, दरियाँ, परदे, घरों की सजावट के सामान, अस्तर और रस्सियाँ भी बनती हैं।  जूट के लिए उष्ण-आद्र जलवायु अधिक उपयुक्त है | तापमान लगभग २३ ० C होना चाहिए इसके लिए २०० सेमी से २५० सेमी बर्षो की आवश्यकता होती है | जूट उगाने के लिए सस्ता और प्रचुर श्रम अपेक्षित है क्यूंकि जूट की बुबाई से इसका रेशा प्राप्त करने तक की प्रक्रिया में पर्याप्त श्रम की आवश्यकता पड़ती है | संसार में भारत का स्थान जूट उत्पादन में दूसरा है | भारत में जूट के उत्पादक राज्य पश्चिमी बंगाल ,विहार तथा असम है | कुछ जूट उत्तर प्रदेश के तराई तथा उड़ीसा के तटीय भागो में भी पैदा किया जाता है |
जूट की खेती
 जूट की खेती गरम और नम जलवायु में होती है। हल्की बलुई, डेल्टा की दुमट मिट्टी में खेती अच्छी होती है। पौधे के तीन से लेकर नौ इंच तक बड़े होने पर पहले गोड़ाई की जाती है। जून से लेकर अक्टूबर तक फसलें काटी जाती हैं।







चावल

चावल

चावल एक मानसूनी जलवायु का पौधा है | इसके उत्पादन में भारत का दूसरा स्थान है | विश्व के उत्पादन का ३० प्रतिशत चावल भारत में पैदा किया जाता है | चावल की कटाई  अक्टूबर-नवंबर
में की जाती है। चावल एक उष्ण कटिबन्धीय फ़सल है एवं भारत की मानसूनी जलवायु में इसकी कृषि की जाती है।

मौसम
बुआई और रोपण के लिए दो मौसम होते हैं:- रबी और ख़रीफ़ मौसम। चावल एक ख़रीफ़ फ़सल है।

चावल की खेती

चावल की खेती के लिए २० ०C का औसत तापमान तथा १०० से २०० सेमी की सुनिश्चित बर्षा आवश्यक होती है | जहाँ बर्षा कम होती है वहाँ सिंचाई करके भी चावल पैदा करने का प्रयत्न किया जाता है |  जैसे पंजाब तथा हरियाणा | चिकनी तथा मटियार मिटटी ,जिसमे पानी रुक सके चावल की उपज के लिए उपयुक्त होती है | उत्पादन बढाने के लिए हरी खाद गोबर की खाद तथा रासायनिक खाद की भी आवश्यकता पड़ती है | चावल की रोपाई तथा निराई आदि के लिए सस्ते तथा अधिक मजदूरों कीभी आवश्यकता पड़ती है  विभिन्न राज्यों में पैदा की जाने वाली चावल की कुछ विशेष किस्में इस प्रकार हैं मेतासनालू (आन्ध्र प्रदेश), करुवाई, कालाजीरा (पश्चिम बंगाल), जरीसाल (गुजरात), बासमती (उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड),आदि।

देश में चावल की तीन फ़सलें
देश में चावल की तीन फ़सलें 'अमन (शीतकालीन), औस (शरदकालीन) तथा बोरो (या ग्रीष्मकालीन)' पैदा की जाती हैं। मैदानी भागो में चावल के खेतो में पानी रोकने के लिए मेडबंदी की जाती है तथा पहाड़ो पर सीढ़ीदार खेतों में भी पानी रोका जाता है | भारत में पश्चिम बंगाल  सबसे  अधिक चावल उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश ,तमिलनाडु ,उड़ीसा आन्ध्र प्रदेश ,मध्य प्रदेश तथा असम है उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों ,पंजाब तथा हिमाचल प्रदेशों में भी चावल पैदा किया जाता है |