Tuesday, 29 March 2016

बोलीं इलियाना, 'हैप्‍पी एंडिंग' कॅरियर का एंड नहीं, 'रुस्‍तम' कराएगा वापसी


बीते दिनों फिल्म 'हैप्‍पी एंडिंग' में नजर आने वाली बॉलीवुड एक्‍ट्रेस इलियाना डिक्रूज एक बार फिर सुर्ख़ियों में लौट आई है | अपने सुर्खियों में आने का कारण खुद इलियाना ही हैं। दरअसल वह कहती है की 'हैप्‍पी एंडिंग' फिल्म से उनके  कॅरियर का एंड नही हुआ है | बल्कि यह तो उनके कॅरियर की सही मायने में बिगनिंग थी |
यह है जानकारी बता दे की इलियाना डिक्रूज जल्द ही एक नई फिल्म के साथ इंडस्‍ट्री में नजर आने वाली है | यह है फिल्म रुस्तम | इस बारे में इलियाना का कहना है कि 'रुस्‍तम' एक गूढ़ फिल्‍म है। फिल्‍म में कई सारे कॉम्‍प्‍लीकेशंस हैं, जिन्‍हें देखकर दर्शक बहुत एंज्‍वाय करेंगे। वह कहती हैं कि वह खुद भी इस फिल्‍म को लेकर काफी एक्‍साइटेड हैं।

हैप्‍पी एंडिंग' में नजर आई थी 
इससे पहले इलियाना फिल्‍म 'हैप्‍पी एंडिंग' में नजर आईं थीं। फिल्म में उन्होंने सैफ अली खान के साथ किरदार भी निभाया था | अब एक लम्बे अरसे के बाद इलियाना को वापस देखकर दर्शक बहुत खुश होंगे |

इलियाना ने खुद इस बारे में ऐसा बताया 
इसके अलावा जिस कार्यक्रम में इलियाना को पहुंचना था वहां खुद वे बेहद साधारण कपड़े पहनकर पहुंची थी। इस बारे में उन्‍होंने खुद ही बताया कि उन्‍हें हमेशा आरामदायक कपड़े पहनने पसंद हैं। सिर्फ यही नही हर तरह से उनको साधारण रहना पसंद है |  

परेड अग्निकांड में 'सियासत' का मरहम



पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल तथा नेता संजय सिंह ने घटनास्थल का दौरा किया |
कानपूर- परेड बाजार में अब आग लगने से सियासी रोटियां सेंकी जानी शुरू हो चुकी है |अग्निकांड के 24 घंटे बाद संडे को पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल ने परेड ग्राउंड पहुंचकर घटनास्थल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने आग से हुए नुकसान का जायजा भी लिया। इसके अलावा पीड़ित व्यापारियों से बातचीत करके उनको उचित मदद दिलवाने का भरोसा भी दिया | वही आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह को परेड ग्राउंड पहुंच कर व्यापारियों द्वारा होने वाले नुकसान का जायजा लिया |और पीडि़तों को ढांढस बंधाया।

न्यायिक जांच की मांग
परेड मार्केट अग्निकांड को लेकर संडे को राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल का एकप्रतिनिधिमंडल डीएम से मिला।काउंसिल के जिला महासचिव फखरुल इस्लाम ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने इस अग्निकांड की न्यायिक जांच की मांग की है। इसके अलावा भी उन्होंने मृतक बच्ची के परिवार को मुआवजा देने के साथ ही नष्ट हुई दुकानों को मुआवजा देकर उन्हें पक्का बनवा कर पीडि़त व्यापारियों देने की भी मांग की गई |

भारत की जीत के बाद एक लाइव शो में वसीम अकरम को भगाया


पाकिस्‍तान के भूतपूर्व दिग्‍गज गेंदबाज वसीम अकरम के साथ एक लाइव शो में दुर्रव्‍यवहार किया गया | अकरम को बीच बहस में ही उठाकर भगा दिया गया। हालाँकि इसके पीछे असली वजह यह थी क्या इसका कारण पता नही चल सका | टी-20 वर्ल्‍डकप मैचों में कमेंट्री कर रहे पूर्व पाकिस्‍तानी बॉलर वसीम अकरम उस समय सकते में आ गए। जब एक लाइव टीवी शो के दौरान उनको बीच बहस में हटा दिया गया। दरअसल अकरम भारत-ऑस्‍ट्रेलिया मैच के बाद भारत की ऑस्‍ट्रेलिया पर 6 विकेट से हुई जीत पर एक चैनल की डिबेट में भाग ले रहे थे | और मुंबई से लाइव भी थे |तभी एक आदमी अचानक एक कैमरे के आगे आकार खड़ा हो गया | और उन्‍हें तुरंत उठाने लगा। न्यूजरूम में बैठा एंकर यह सब देखकर काफी शॉक्‍ड हो गया।

क्रिकेट फैंस हो गए नाराज 
वसीम अकरम के साथ हुई इस घटना के बाद क्रिकेट फैंस काफी चिंतित हो गए साथ ही वे नाराज भी थे फैंस लगातार ट्वीट किये जाने के बाद यह जानना चाहते थे की आखिर उनके साथ क्या हुआ | कुछ यूजर्स ने आशंका जताई है कि इस लाइव शो में शिवसेना या एमएनएस के मेंबर्स ने बाधा पहुंचाई है।

इन देशो की आर्मी ट्रेनिंग करती है रोंगटे खड़े कर देने वाली एक्‍सरसाइज


दुनिया के सभी देशो की आर्मी ट्रेनिंग की वर्दी व नियम अलग-अलग होते है | जिनमे  ट्रेनिंग की एक्सरसाइज अलग-अलग होती है | हर देश में कठिन से कठिन ट्रेनिंग दी जाती है | जिसमें कहीं जवानों को बर्फ पर रहने, रस्‍सी के सहारे ऊंचाई पर चढ़ने तो कहीं भयंकर सर्दी में भी लड़ने की एक्‍सरसाइज कराई जाती है।

आइए जानते है दुनिया के ऐसे ही १० देशो की आर्मी एक्‍सरसाइज के बारे में....

रूस आर्मी
यहां पर बड़ी ही अजीब तरह से एक्‍सरसाइज होती है। यहां पर दो सिपाही एक सिपाही के हाथ पैर पकड़ते हैं। इसके अलावा एक सिपाही उस पकड़े हुए पर एक दूसरा सिपाही काफी तेजी से पंच करता है। यह पंच उसके पेट आदि पर मारे जाते हैं।

तालिबान आर्मी
तालिबान आर्मी में बम से सुसाइड करने की ट्रेनिंग दी जाती है। जिसमें ये साफ है कि यहां पर आर्मी के जवानों को बमों आदि से डर नहीं लगता है। वे बम आदि को बिल्‍कुल हल्‍के में लेते हैं।

इजरायल आर्मी
यहाँ पर बड़ी इमारतो से सैनिको को खिडकियों पर चढ़ने की एक्‍सरसाइज कराई जाती है। वे रस्सियों के सहारे काफी ऊंचाई पर जाते हैं।

चीन आर्मी 
यहाँ पर आर्मी की एक्‍सरसाइज दुसरे देशो की अपेक्षा काफी कड़ी होती है |जवानों को ग्रेनेड कंट्रोल करना होता है। जिसमें सैनिकों पर ग्रेनेड फेंका जाता है और जवानों को उस विस्‍फोट से गुजरना होता है।  

यूएस आर्मी
यूएस में सैनिकों को कोबरा का खून पिलाया जाता है। इससे उनमें काफी ताकत आती है। यह उनकी ट्रेनिंग का एक विशेष भाग हैं।

यूएस नेवी
यहां पर जवानों को ड्रोन प्रूफ करवाना होता है। यहाँ पर जवानों को ठंडे पानी में करीब 5 मिनट तक अंदर रहना होता है। यह प्रकिया एक बार में करीब 20 बार करना होता है।

ब्रिटिश आर्मी 
ब्रिटिश आर्मी में तकरीबन आठ महीने तक ट्रेनिंग कराई जाती है | उनकी इस ट्रेनिंग  में कीचड़ में रहना एक एक्‍सरसाइज है।इस दौरान तय समय से पहले रुकना नहीं होता है।

चीन आर्मी
इस ट्रेनिंग में जवानों को आग के जलते हुए गोले से कूदना होता है। यह एक्‍ससाइज का एक जरूरी भाग है।

 बेलारूस आर्मी
 यहाँ की आर्मी काफी फिजिकली मजबूत है यहाँ पर आर्मी के जबान सुबह-सुबह हाथो से ईट आदि तोड़ते है | और इस दौरान यहाँ काफी हल्के  कपडे पहने जाते है |

ताइवान आर्मी
ताइवान में आर्मी की एक्‍सरसाइज काफी कठिन है। यहां पर जवानों को काफी मोटी मोटी चट्टानों पर लेटकर चलना होता है। इस दौरान वे बिना कपड़ों के रहते हैं।

हेडली के 10 खुलासे

मुंबई की एक अदालत में गवाही के तीसरे दिन आतंकवादी डेविड हेडली के कई बड़े-बड़े राजो पर से पर्दा उठाया है | यहाँ उसने खुद से जुडा सबसे बड़ा सच यह बताया कि वो अपने बचपन से ही भारत से नफरत करता आ रहा है।अपनी गवाही में हेडली ने कहा कि वह लश्कर ए तैय्यबा का सच्चा समर्थक है। लश्कर का साजिद मीर उसका हैंडलर था। साजिद मीर चाहता था कि वह भारत में कोई कारोबार स्थापित करे। साजिद ई-मेल के जरिए उसके साथ संपर्क में था।जब उसने अपना नाम बदला तो इसकी जानकारी उसने साजिद मीर को दी थी। आइये हेडली के तीसरे दिन की गवाही के बाद के कौन से खुलासे सामने आए |

 १. हेडली ने बताया कि वह 7 दिसंबर, 1971 से भारत से नफरत करता चला आ रहा है। यह वह समय था जब ये वो समय था जब भारतीय विमानों ने उसके स्‍कूल के ऊपर बमबारी की थी। उस बमबारी में पूरा स्‍कूल तहस-नहस हो गया और वहां काम करने वाले सभी लोग मारे गए। 
 
२. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी उसके पिता के दोस्‍त थे और 2011 में उनकी मौत के बाद भी आते-जाते थे। 

3 . हेडली ने बताया कि उसके पिता, पाकिस्तान रेडियो के एक पूर्व महानिदेशक थे और वे इस बात को जानते थे | कि वह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का ऑपरेटिव है, लेकिन वह इस बात को स्वीकार नहीं करते थे। 

४. हेडली ने बताया कि उसने शिवसेना के फंड को इकट्ठा करने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन यूएस में करवाया था | इस कार्यक्रम में उन्होंने पार्टी के संस्थापक कुलपति बाल ठाकरे को भी आमंत्रित किया था | लेकिन इस कार्यक्रम में उन्होंने उनको मरने का कोई प्लान नही बनाया था |


५. 26/11 से पहले हेडली को लश्‍कर के संचालक साजिद मीर की ओर से एक मैसेज मिला। जिस पर लिखा था कि 'the game is afoot'। इसका मतलब था कि खेल अभी चल रहा है। 

६. 26/11 अटैक से पहले हेडली भारत के न्‍यूक्‍लियर प्‍लांट जरूर आया था, लेकिन मुंबई हमलों से संबंधित निगरानी का संचालन करने के लिए नहीं बल्‍कि ये देखने के लिए कि क्‍या वह लश्‍कर के लिए न्‍यूक्‍लियर प्‍लांट से किसी को अप्‍वाइंट कर सकता है।  

7 . हेडली ने बताया कि तहव्‍वुर राणा ने 26/11 अटैक से पहले उसके लिए एक फेक ई-मेल आईडी बनबाई थी। इस ई-मेल आईडी के द्वारा वे आपस में बातचीत कर सकते थे। इसकी कोई रिकॉर्डिंग ही नहीं बनी, क्‍योंकि ये फॉरेन लैंग्‍वेज में था। इस वजह से ज्‍यूरी और उसको, दोनों को एक इंग्‍लिश ट्रांसक्रिप्‍टर दिया गया |
जिसस वह उसका अनुवाद कर सके | 
  
 8 . वह अपने जेल के स्थान, जहां वह कैद है, उसका खुलासा नहीं कर सकता। न ही तो वह उन सुविधाओं के बारे में बता सकता है जो उसको जेल के अंदर मिलती थीं। 

9.  इसके बावजूद ये सच है कि यूएस की जेल में वह एक शानदार और आरामदायक जिंदगी जी रहा है।

10.  उसने यूएस में तहव्‍वुर राणा के खिलाफ कभी इशरतजहां का नाम नहीं लिया। न ही कभी उसके बारे में पूछा | न ही वह उसके बारे में कुछ जानता था | वह सिर्फ वही करता जा रहा था, जो उसको करने को कहा गया । 

Friday, 25 March 2016

दस बाते जो होली के बाद भी आपको बनाए हैंडसम और ब्यूटीफुल


होली का त्यौहार मतलब रंगों की मस्ती में डूब जाना | होली पर मस्ती की कोई सीमा नही होती लेकिन स्वास्थ्य तथा  सौंदर्य से जुडी हुई कुछ सावधानियां रखना जरुरी होता है | होली पर इन दस बातो का विशेष ध्यान रखे ताकि होली के रंग में भंग न पड़ जाए |

1.होली के साथ-साथ हमे अपनी त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष देखभाल रखनी होती है | जब भी आप होली खेलने घर से निकले अपनी त्वचा पर कोई तैलीय क्रीम या फिर तेल, घी या फिर मलाई लगाकर निकलें, ताकि त्वचा पर रंगों का बुरा असर न पड़े |

2. बालो को रंगों से बचाने का पूरा प्रयास करना चाहिये | क्यूंकि रंग आपके बालों को रूखा, बेजान और कमजोर बना सकते हैं। क्यूंकि रंग आपके बालो का पोषण भी छिन सकते है |

3. होली खेलते समय  आँखों  का भी काफी  ख्याल रखना होता है | अगर आँखों में रंग चला जाये तो सबसे पहले आँखों को साफ पानी से धोए | यदि आंखे धोने के बाद भी तेज जलन हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

4. अगर आँखों पर गलती से गुब्बारा लग जाए या खून निकलने लगे तब पहले सूती कपडे से आंखे ढके या फाहा लगाए | इसके बाद डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

5. होली के हरे रंग में कॉपर सल्फेट पाया जाता है | इस बात का विशेष ध्यान रखें। की यह रंग आंखों में एलर्जी, सूजन अंधापन जैसी समस्याएं पैदा कर देता है |

6. सिल्वर जैसे चमकीले रंग का इस्तेमाल कतई न करें। इसमें एल्युमीनियम ब्रोमाइड होता है, जो त्वचा के कैंसर के लिए जिम्मेदार हो सकता है | वहीं काले रंग में उपस्थि‍त लेड ऑक्साइड किडनी को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है |

7. होली खेले लेकिन पुरे होश में खेले | ज्यादा नशा करना आपके स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता ही है बल्कि कई बार घटनाओ का कारण भी बन जाता है | इसलिए होली को सुरक्षित तरीके से ही खेले|

 8. बाजार की मिठाईयों को सेवन करने से बचें। इनमें मिलावट भी हो सकती है, जो आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। घर पर बने व्यंजनो  का पूरा  मजा ले सकते है  क्योंकि वे शुद्धता के साथ बनाए जाते हैं।

9. होली के पर्व पर कई बार लड़ाई-झगड़े भी हो जाते हैं, लेकिन यह एक भाईचारे का पर्व है | अपना भाईचारा  बनाये रखे | और मिल-जुलकर रंगों के साथ होली मनाए |

10.कोशिश यही करे की रंग हर्बल हो | इन रंगों का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता और इन्हे आसानी से घर में भी बनाया जा सकता है | लेकिन बाजार में  हर्बल रंग भी  उपलब्ध हैं।




Monday, 21 March 2016

अफजल गुरु नही ,रोहित वेमुला है मेरे आदर्श: कन्हैया


जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष ने मीडिया के सामने रखी अपनी बात नई दिल्ली अफजल गुरु नहीं, बल्कि रोहित वेमुला मेरे लिए आदर्श है | मै व्यक्ति के तौर पर एक जगह हूँ , जेएनयू स्टूडेंट यूनियन प्रेसीडेंट के तौर पर अलग और गरीब माँ मीना देवी के बेटे के तौर पर अलग हूँ | मैं जेएनयू छात्रसंघ के आधार पर अपनी बात रख रहा हूँ | अफजल गुरु भारत के संबिधान के तहत अखंड भारत के नागरिक थे | भारतीय संबिधान के तहत कानून ने उसे सजा दी लेकिन यही कानून हमे बोलने की भी आजादी देता है |यह कहना है जवाहर लाल नेहरु विश्वविध्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार का | जेएनयू कैंपस में छात्रसंघ अध्यक्ष ने जेल से छुटने के बाद पहली बार शुक्रवार को मीडिया से बात की हालाँकि अफजल गुरु पर एक बार और स्थिति स्पष्ट करने के सवाल को वह टाल  गए, जबकि इस प्रश्न पर वहां मौजूदा छात्र शोरशराबा व रोकटोक करने लगे कन्हैया ने कहा कि मै आपके माध्यम से अपनी आवाज देश की जनता तक पहुचाना चाहता हूँ| हम जेएनयू के छात्र देश के लोगो को आश्वस्त करना चाहते है कि उनके टैक्स से मिलने वाली सब्सिडी से जेएनयू में छात्र पढ़ते है और उनका पैसा बिल्कुल गलत खर्च नही हो रहा | देश की जनता को विश्वास दिलाता हूँ कि हम भी कश्मीर को भारत का ही अंग समझते है मै नेता नही विधार्थी हूँ | और आगे शिक्षक बनना चाहता हूँ | पीएम पर साधा निशाना कन्हैया ने कहा , देशद्रोह और राजद्रोह में फर्क होता है देश की सरकार एक पार्टी की सरकार एक दफ्तर की सरकार बनकर रह गई है उनको यह याद दिलाना है कि  आप देश के पीएम है, शिक्षा मंत्री है मै साफ कर दूँ कि हमारे आपसे मतभेद है , मतभेद नही अंग्रेजो ने देशद्रोह का कानून बनाया था | इस देश के अंदर न्याय के पक्ष में खड़े होने वालो के खिलाफ इसका इस्तेमाल किया गया इसे खत्म करना चाहिये |