Saturday, 1 August 2015

पूजा करने का स्थान

हम भगवान की   प्राथना खुद को सुरक्षित और खुश रखने के लिए करते है और खुद को अच्छा इन्सान बनाने के लिए करते है | हम इन सबके लिए ईश्वर का धन्यबाद करते है | कि वो हमे सब देता है | लोग बिभिन्न धर्म के होते है | वे ईश्वर की पूजा बिभिन्न प्रकार से करते है | प्रशांत के बहुत से मित्र आसिफ जाहन और गुरमीत आदि है | प्रशांत हिन्दू है आसिफ मुस्लिम ,जाहन , क्रिस्चियन तथा गुरमीत सिकख है | हिन्दू मन्दिर में पूजा करते है | वे मिठाईयां और फूल बिभिन्न भगवानो को चढाते है | भगवान जैसे राम , क्रिशन और शिवा मुख्य भगवान है |दुर्गा और लक्ष्मी मुख्य भगवान है | रामायण और भागवत गीता हिन्दुओ की पवित्र ग्रन्थ है | क्रिश्चयन चर्च जाते है | और जीजस क्राइस्ट की प्राथना करते है | उनकी पवित्र ग्रन्थ बाइबिल है | मुस्लिम मज्जिदो में पूजा करते है | वे एक दिन में पांच वार नुमाज अदा करते है \ उनकी पवित्र ग्रन्थ कुरान है | ‘’ गुरु ग्रन्थ साहिब है | ‘’ वे गुरुवाणी हिम्नस गाते है | जैन ‘’ लार्ड महाविरा की पूजा करते है | बुद्ध लार्ड बुद्ध की पूजा करते है | पारसिस पारसी पूजा करते है , मन्दिर में | हम सब पूजा करते है | हम सब भगवान की पूजा बिभिन्न स्थानों पर भिन्न प्रकार से करते है | लेकिन हम सब एक ही भगवान को पूजते है | हमे सभी धर्मो को आदर देना चाहिए |

हिंदू धर्म

हिंदू धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म माना जाता है; हालांकि, यह "जीवन का एक रास्ता" या बजाय एक धर्म का एक दर्शन है कि यह कॉल करने के लिए और अधिक सटीक हो सकता है। हिंदू धर्म अविश्वसनीय रूप से विविध है और यह गहराई से भारत में लोगों और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। यह न तो उसके आवेदन सुनिश्चित करने के लिए एक "चर्च" या संस्था, और अन्य धर्मों की तरह कोई भी पवित्र पाठ, लेकिन कई है, एक एकल संस्थापक व्यक्ति नहीं है। हिंदू धर्म पुनर्जन्म में विश्वास के द्वारा होती है, कई अभिव्यक्तियों में से एक पूर्ण किया जा रहा है, कारण और प्रभाव के कानून, और जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति के लिए इच्छा। यह दुनिया भर में एक बहुदेववादी धर्म के रूप में स्वीकार किया जाता है; हालांकि, कई हिंदुओं ब्रह्म नामित एक सर्वोच्च और अंतिम जा रहा है में विश्वास करते हैं। शिव, विष्णु, और ब्रह्मा: हिंदू धर्म के तीन मुख्य देवताओं में ब्रह्म वैयक्तिकृत करता है। हिंदू मंदिरों प्रसाद, रस्में और प्रार्थना के माध्यम से भगवान और देवताओं, पूजा करने के लिए बनाया जाता है। पूजा मंदिर में जाने के लिए एक विशेष दिन वहाँ कोई नहीं है, बल्कि सामूहिक तुलना में मुख्य रूप से व्यक्तिपरक है, और यह भी कि यह हर दिन अभ्यास किया जा सकता है। हिंदू मंदिर में भाग लेने के लिए कारण उसे या उसके महान आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए, किसी विशेष देवता यात्रा है। हिंदू मंदिर हम दिव्यता का अनुभव कर सकते हैं, जहां एक विशेष स्थान है। मैं दक्षिण पश्चिम ranches, फ्लोरिडा में स्थित हिंदू मंदिर की यात्रा करने का मौका था। मैं हिंदू धर्म के एक पूर्व ज्ञान है, लेकिन मैं पहले एक मंदिर गई कभी नहीं किया है। मैं पहले अपनी इस यात्रा के लिए मंदिर दिनों के लिए कहा जाता है, और मैं "जीवन का एक रास्ता" है, जो अपनी संस्कृति और धर्म के बारे में अधिक जानने में बहुत दिलचस्प था कि उन्हें समझा। उन्होंने सुझाव दिया कि अपनी इस यात्रा मैं लग रही है और यह भगवान का घर है, क्योंकि मेरा सबसे अच्छा महसूस करना चाहिए के दिन। यह शामिल स्नान और साफ कपड़ों पर डाल। पारंपरिक कपड़े पहने हुए ...अब सम्मिलित हों

घर

शेल्टर हमारी मूल आवश्यकता होती है | प्रतयेक को एक घर (S) की आवश्यकता होती है | our house provides us shelter

हम घर में क्यों रहते है ?
हम सब अपनी आवाशक्यकता  के लिए घर में रहते है | हम हमारी ठण्ड , गर्मी ,बर्षा , चोरो और जगंली जानवरों से रक्षा करता  है | हम अपने घर में सुरक्षित महसूस करते है | एक मकान एक घर है , जहाँ परिवार वाले इसमे रहते है | कई गांवो में बहुत से लोग एक छोटी झोपड़ी में रहते है | झोपडियां घास , मड और झण्डियो इत्यादी की बनी होती है | ये ज्यादा पक्के नही होते है | इन्हे कच्चा मकान कहते है \ शहरो व नगरो में मकान ईटो , सीमेंट , आयरन , मिटटी , लकड़ी, इत्यादी के बने होते है ये मकान पक्के होते है | इन्हे पक्का मकान कहते है |

बंगलाउस , फ़्लैट ,और स्काईस्पेस क्या है ?
कुछ लोग बड़े घरो में रहते है ,जिन्हें बंगला कहा जाता है | बंगले में एक लॉन या बगीचा एक बरामदा और एक बड़ी बिल्डिंग रखता है | बड़े शहरों में एक multi stored building होती है | many houses are built together in these building . जो flat  कहलाते  है ,flat help us to save space बड़े शहरों में multi storedyed building
होती है , जिन्हें स्काई स्क्रेपेस कहा जाता है |

चलित घर –
कुछ घर temporery house होते है | वे एक स्थान से दुसरे पर सरकाये जाते है caravans टैंट और नाव  वाले घर चालित घर होते Gypsies are nomadic people  वे पहिये वाले घरो में रहते है | carvana कहा जाता है | सोल्जर स्काउट NCC केवेट और लोग टेंट हाउस वाले घरो में रेगिस्तानों में रहते है | एक हाउस बोट तैरने वाले मकान झीलों में तैरते है |

घर कैसे बनाया जाता है –
कई लोग building वाले मकान की मदद करते है | पहला एक आर्किट एक मकान को प्लान करता  है | एक मिस्त्री  ( manson ) ईटो और प्लास्टर से उनको बनाता है plumber ,water pipe etc बनाता है | कारपेंटर , खिड़की दरवाजे और अलमारी इत्यादी बनाते है एक मैकेनिक विधुततार , प्लग और स्विच आदि को fit करती है | painter ,सफ़ेद washing और painting करता है | हमे हवादार और प्रकाशवान घर में रहना चाहिए |



हमारा भोजन

 भोजन की आवश्यकता
भोजन हमारे लिए मूल आवश्यकता है ,हमे जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है | भोजन हमारी व्रधि ,मजबूती और स्वस्थ रहने में मदद करता है | भोजन हमे खेलने और काम करने के लिए ऊर्जा देता है |

भोजन के विभिन्न प्रकार –
भोजन बिभिन्न रूपों का होता है | भोजन के प्रतयेक प्रकार के हमारे लिए special तरह से मदद करता है | भोजन जैसे -चीनी ,मक्खन ,रोटी ,आलू ,चावल ,दाले ,घी चपातियाँ आदि हमे energy देते है | भोजन जैसे मछलियाँ अंडे ,दूध ,पनीर और सब्जियां हमारी हड्डियों व मांसपेशियों को मजबूत बनता है | सव्जियो और फल हमे स्वस्थ रखते है | यह हमे वीमारी से बचाने में तथा ठीक रहने के लिए मदद करता है , कुछ सब्जियां जैसे ,गाजर ,टमाटर मूली आदि कच्चे सलाद की  तरह खाई जाती है | भोजन जैसे चावल , गेहूं ,दाले ,मीट मछलियाँ को कच्चा नही खाया जाता है | वे पकाये जाते है | पके भोजन मुलायम और पाचन में easy होते है | spice make them testiror .

सन्तुलित मात्रा क्या है –
भोजन की मात्रा जिसे हम रोज खाते है | हमारी डाइट कहलाती है | एक आधार (D)  जिसमे सभी पदार्थ एक व्यक्ति को स्वस्थ बनाती है | सन्तुलित आहार कहलाता है | सन्तुलित आहार  स्वा–स्थय के लिए अच्छा होता है |

हम भोजन कब लेते है –
 सुबह हम ब्रेकफास्ट लेते है हम ब्रेड के साथ चाय और दूध लेते है | और नाश्ते में मक्खन दोपहर में हम लंच लेते है | हम चावल , दाले चपाती , सवाजियाँ , दई ,इत्यादी लंच में लेते है | कुछ लोग मछली ,अंडे ,मीट इत्यादी खाते है | शाम को चाय के साथ बिस्कुट लेते है | रात में डिनर करते है |

अच्छी खाने की आदते
१-        हमे भोजन ठीक समय पर करना चाहिए |
२-        हमे खाना खाने से पहले और बाद में हाथ धोना चाहिए |
३-        हमे हमेशा साफ , तला और अच्छी तरह से पका हुआ खाना खाना चाहिए |
४-        रखा  हुआ और खुला हुआ भोजन हमे बीमार बनाता है |
५-        हमे ख़राब खाना नही खाना चाहिए |
६-        हमे खाना केवल तब खाना चाहिए ,जब हमे भूख महसूस करे |
७-        we should chew our food properly .
८-        हमे भोजन को ख़राब नही करना चाहिए |

भोजन कहाँ से आता है ?
चावल ,गेहूं ,दाले और सबजियाँ खेतो में उगते है | किसान उन्हें उगाते है | हमे दूध, अंडा ,मांस , मछली जानवरों से मिलता है | दूध हमे cattle milch से मिलता है | हमे अंडे मुर्गी से और मीट जानवरों से मिलता है | जैसे भेड़ ,बकरी , cattle और मछली |
मछली पानी में रहती है | मछुवारा उन्हें पकड़ता है | और हमे बेचता है |


ग्लोबल वार्मिंग के खतरे

ग्लोबल वार्मिंग अर्थात् विश्वव्यापी तापक्रम वृद्धि से तात्पर्य विश्व के औसत तापक्रम में आई वृद्धि से है। आज पूरे विश्व के लिए यह चिंता का विषय बन चुका है। ग्लोबल वार्मिंग के अंतर्गत अनावश्यक तापक्रम वृद्धि से उत्पन्न विश्वव्यापी खतरों को चिन्हित किया जाता है। विश्व के अधिकांश देशों ने ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को भाँप लिया है। ग्लोबल वार्मिंग ने अपनी प्रचंडता का प्रदर्शन करना प्रारंभ कर दिया है। दिन-व-दिन पृथ्वी गर्म होती जा रही है। ऐसा माना जाता है कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए सर्वाधिक विकसित एवं विकासशील देश जैसे सं0रा0अमेरिका, रूस, चीन, यूरोपीय देश एवं भारत जैसे देश इसके अंतर्गत आते हैं। परमाण्वीय तथा वैज्ञानिक प्रयोगों, लगातार बढ़ते प्रदुषणों आदि के कारण भूमण्डलीय तापक्रम तेजी से बढ़ रहा है। वाहनों तथा कल-कारखानों में अप्रत्याशित वृद्धि ने तो वायु प्रदुषण को अनियंत्रित कर दिया है। इससे वायुमंडल में कार्बन-डाय-आॅक्साइड एवं सल्फर डाय-आॅक्साइड जैसे विषाक्त गैसों की मात्रा में लगातार वृद्धि पराबैंगनी किरणों का अंश पृथ्वी तक पहुँचने लगा है और हम त्वचा संबंधी अनेक रोगों से ग्रसित होने लगे हैं। इससे ग्लोबल वार्मिंग विकराल रूप ले चुका है। मूल प्रश्न यह है कि आखिर समस्त विश्व ग्लोबल वार्मिंग के प्रति सजगता और एकजुटता क्यों प्रदर्शित करने लगे हैं? इसका मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग से होने वाले पूरे विश्व के अस्तित्व के खतरे से है। पृथ्वी के तापक्रम में वृद्धि से धु्रवों पर जमी बर्फ लगातार पिघल रही है और ग्लेशियर का हा्रस होता जा रहा है। इससे महासागरों के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे धु्रवीय क्षेत्रों में निवास करने वाले प्राणियों तथा पेड़-पौधों की अनेक प्रजातियाँ या तो विलुप्त हो गई हैं या विलुप्तप्राय हैं। वर्षा के वितरण में असमानता उजागर होने लगी हैं। प्राकृतिक आपदाओं में अत्यन्त वृद्धि हुई है। ऐसा माना जाता है कि यदि इसी प्रकार से वनोन्मूलन संबंधी गतिविधियां सक्रिय रहीं तो दिन-व-दिन पृथ्वी के तापक्रम में वृद्धि होती ही जाएगी और वह दिन दूर नहीं कि धु्रवों पर जमी समस्त बर्फ पिघल जाएगी और पूरी पृथ्वी जलमग्न हो जाएगी जिससे जीवों का अस्तित्व मिट जाएगा। जैसा कि हर समस्या का समाधान भी होता है वैसा ही ग्लोबल वार्मिंग का भी समाधान है। हमारी आपसी समझ-बूझ और संसाधनों के समझदारी से उपयोग से यह संभव है। हमें वृक्षारोपण संबंधी गतिविधियों को प्रोत्साहित करना चाहिए। हर उत्सव पर वृक्षारोपण को इसका अंग बनाना होगा। ग्लोबल वार्मिंग के उन्मूलन हेतू हर राष्ट् को दीर्घव्यापी उपाय ढूँढना होगा। विभिन्न राष्ट्रों को अपना मानक तैयार करना होगा जिससे इसे नियंत्रण में रखा जा सके। अनावश्यक वैज्ञानिक गतिविधियों, वैज्ञानिक परीक्षणों, वाहनों की संख्या में होने वाले अप्रत्याशित वृद्धि, कल-कारखानों से उत्सर्जित पदार्थों को नियंत्रित करना होगा। इस प्रकार जन जागरूकता और आपसी सूझबूझ से ग्लोबल वार्मिंग के दैत्य को सदा सर्वदा के लिए समाप्त किया जा सकता है।अतः आज के युवाओं को प्रदुषण को नियंत्रित करने हेतू सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों में हिस्सेदार बनना चाहिए। उन्हें प्रदुषण को नियंत्रित करने हेतु जनजागरण के कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना चाहिए। पूरे विश्व में अस्त्र-षस्त्रों की होड़ तथा गैर-जरूरी वैज्ञानिक गतिविधियों को प्रतिबंधित करना होगा तभी हम प्रदुषणरहित विश्व की कल्पना कर सकते हैं।

ग्रीन हाउस या ग्लास हाउस प्रभाव

सौर बिकिरण के सम्बन्ध में वायुमंडल के कार्य की तुलना ,ग्रीन हाउस , या ग्लास हाउस के कार्य से की जा सकती   हैं |   ग्रीन हाउस या ग्लास हाउस सूर्यातप को अन्दर तो आने देता है लेकिन ताप को इतनी आसानी से बाहर निकलने नही देता | ठीक इसी प्रकार वायुमंडल की बिभिन्न परतो में से होकर सुर्यातप आसानी से प्रवेश तो कर जाता है ,परन्तु वायुमंडल में बिधमान कार्बन डाइ ऑक्साइड एवं जलवाष्प जैसी गैसे इसे आसानी से बाहर निकलने नही देती हैं फलस्वरुप किसी भी स्थान के दिन और रात के तापमान में अत्यधिक अंतर नही होता है | वायुमंडल का यह  हरित गृह प्रभाव प्रथ्वी पर १५ ०c का औसत तापमान बनाए रखता है |
ग्रीन हाउस या ग्लास हाउस की आवश्यकता कृषि उत्पादन के लिए उन स्थानों पर होती है जहाँ कृषि की द्र्स्टी से तापमान न्यून रहते है | ग्रीन हाउस काँच का बना हुआ एक घर होता है लेकिन शीघ्रता से पार्थिव बिकिरण नही होने देता | इसलिए ग्रीन हाउस के अन्दर तापमान अधिक हो जाने पर फलों ,सव्जियो और फूलो को आसानी से उगाया जा सकता है | ग्रीन हाउस तथा वायुमंडल के कार्यो में साम्यता होने के कारण ही वायुमंडल को प्रथ्वी का  ग्रीन हाउस  कहते है तथा इसके प्रभाव को , ग्रीन हाउस प्रभाव , कहते हैं| 

मन्दिर

राजपूत काल की विशिष्टता विशाल संख्या में राजपूत शासकों द्वारा बनवाए गए मन्दिर है , जो कि भारत के बिभ्निन भागो में बिस्तृत है | राजपूत काल में बने प्रमुख मन्दिरों में से एक खजुराहो का मन्दिर समूह है| झाँसी के समीप स्थित खजुराहो के मन्दिरों का निर्माण चंदेल शासको के समय में हुआ था | यहाँ पर लगभग ३० मन्दिर है,जो कला की द्र्स्टी से उत्कर्ष कोटि के है | खजुराहो मन्दिर समूह में शिवजी का मन्दिर सर्वप्रमुख है,जिसकी ऊंचाई लगभग ११६ फुट है | खजुराहो के अतिरिक्त जोधपुर के समीप ओसिया में भी कुछ ब्राहाण तथा जैन मन्दिर है | चित्तौड़गढ में स्थित कालिका देवी का मन्दिर भी दर्शनीय है | उदयपुर में स्थित शिव मन्दिर का निर्माण भी राजपूत काल में ही हुआ था | उत्तर भारत के अतिरिक्त दछीण व पूर्वी भारत में भी राजपूत युग में अनेक मन्दिरों का निर्माण हुआ | जगन्नाथपुरी का मन्दिर उत्क्रष्ट कला का नमूना है | कोणार्क का सूर्य मन्दिर भी दर्शनीय है | इस मन्दिर पर २०० फुट ऊँचा शिखर था जो कि दुर्भाग्यवश अब नष्ट हो गया है | दछीण भारत  में तंजौर का गंगैकोन्ड़ोचोलपुरम का मन्दिर कला की द्र्स्टी से अत्यंत उच्चकोटि का है | राजपूत युग में निर्मित मन्दिरों में दो प्रकार की शैलियां देखने को मिलती है | आर्य शैली जिसको उत्तर भारतीय शैली भी कहा जाता है , के अंतर्गत मन्दिरों के शिखर वक्राकार व गोल है ,जबकि द्रबिण शैली में शिखर आयताकार खंडो से बनाए गए हैं | इस प्रकार ये पिरामिड के समान लगते है |